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Mother’s Day Special: पटना की महिला अधिकारियों ने मां को बताया अपनी सफलता की असली ताकत

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मदर्स डे पर पटना की महिला अधिकारियों ने अपनी सफलता का श्रेय मां को दिया। एसडीएम, एसपी और एसडीपीओ अधिकारियों ने बताया कि मां के अनुशासन, त्याग और हौसले ने उन्हें हर मुश्किल में मजबूत बनाया।

PATNA/आलम की खबर: मां केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि जीवन की सबसे बड़ी ताकत होती है। एक ऐसा साया, जो हर मुश्किल में हिम्मत देता है, हर हार में भरोसा जगाता है और हर सफलता के पीछे चुपचाप खड़ा रहता है। मदर्स डे के मौके पर पटना की चार महिला अधिकारियों ने अपनी जिंदगी के उन भावुक और प्रेरणादायक पहलुओं को साझा किया, जिन्होंने उन्हें मजबूत, अनुशासित और जिम्मेदार इंसान बनने की राह दिखाई। इन अधिकारियों ने साफ कहा कि आज वे जिस मुकाम पर हैं, उसके पीछे उनकी मां का त्याग, संघर्ष, अनुशासन और अटूट विश्वास सबसे बड़ी वजह है।

पटना की एसडीएम कृतिका मिश्रा, सेंट्रल एसपी दीक्षा, सचिवालय एसडीपीओ अन्नू कुमारी और एसडीपीओ लॉ एंड ऑर्डर-2 दिव्यांजलि ने मदर्स डे पर अपनी मां को याद करते हुए बताया कि प्रशासनिक सेवा जैसी चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी निभाने की ताकत उन्हें परिवार और खासकर मां से मिली। उन्होंने कहा कि मां की सीख केवल बचपन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि जीवन के हर मोड़ पर रास्ता दिखाती है।

एसडीएम कृतिका मिश्रा ने अपनी मां को याद करते हुए कहा कि बचपन में मां का अनुशासन कई बार कठोर लगता था। पढ़ाई को लेकर सख्ती, समय की पाबंदी और व्यवहार में विनम्रता की सीख उस समय सामान्य बातें लगती थीं, लेकिन आज वही चीजें प्रशासनिक जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि उनकी मां हमेशा यह सिखाती थीं कि इंसान चाहे कितना भी बड़ा अधिकारी क्यों न बन जाए, उसे अपने भीतर की संवेदनशीलता और इंसानियत कभी नहीं छोड़नी चाहिए।

उन्होंने बताया कि प्रशासनिक सेवा में कई बार ऐसे फैसले लेने पड़ते हैं, जहां संवेदनशीलता और धैर्य दोनों जरूरी होते हैं। ऐसे समय में मां की बातें उन्हें सही दिशा देती हैं। कृतिका मिश्रा ने कहा कि आज जब लोग उनकी सफलता की बात करते हैं, तब उन्हें सबसे पहले अपनी मां का संघर्ष याद आता है, जिन्होंने हर परिस्थिति में परिवार को संभालते हुए बच्चों के सपनों को कभी टूटने नहीं दिया।

सेंट्रल एसपी दीक्षा ने भी अपने संघर्ष के दिनों को याद किया। उन्होंने बताया कि सिविल सेवा की तैयारी के दौरान सबसे ज्यादा भरोसा उनकी मां को था। जब कभी पढ़ाई का दबाव बढ़ता था या निराशा महसूस होती थी, तब मां की बातें फिर से आत्मविश्वास भर देती थीं। उन्होंने कहा कि परीक्षा के दिनों में उनकी मां खुद उनसे ज्यादा परेशान रहती थीं, लेकिन कभी कमजोर नहीं पड़ने देती थीं।

दीक्षा ने कहा कि मां का विश्वास किसी भी इंसान के लिए सबसे बड़ी ताकत होता है। जब पूरी दुनिया सवाल करती है, तब मां बिना शर्त भरोसा करती है। यही भरोसा मुश्किल समय में आगे बढ़ने की हिम्मत देता है। उन्होंने कहा कि आज भी किसी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में सबसे पहले उन्हें अपनी मां की बातें याद आती हैं।

सचिवालय एसडीपीओ अन्नू कुमारी ने बताया कि उनकी मां ने उन्हें आत्मनिर्भर बनना सिखाया। बचपन से ही छोटे-छोटे काम खुद करने की आदत डाली गई। उन्होंने कहा कि मां हमेशा कहती थीं कि जीवन में परिस्थितियां कैसी भी हों, इंसान को खुद पर भरोसा रखना चाहिए। यही सीख आज उनके प्रशासनिक जीवन में सबसे ज्यादा काम आती है।

अन्नू कुमारी ने कहा कि पुलिस सेवा में हर दिन नई चुनौतियां होती हैं। कई बार तनावपूर्ण हालात में भी शांत रहकर फैसले लेने पड़ते हैं। ऐसे समय में मां से मिली धैर्य और संयम की सीख उन्हें संतुलित बनाए रखती है। उन्होंने माना कि एक अधिकारी बनने से पहले एक अच्छा इंसान बनना जरूरी है और यह संस्कार उन्हें अपनी मां से मिले।

वहीं एसडीपीओ लॉ एंड ऑर्डर-2 दिव्यांजलि ने अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि व्यस्त ड्यूटी और लगातार काम के कारण कई बार परिवार को समय देना मुश्किल हो जाता है। कई बार ऐसा भी होता है कि मां का फोन तुरंत रिसीव नहीं हो पाता, लेकिन दिन खत्म होने से पहले मां से बात जरूर होती है। उन्होंने कहा कि चाहे दिन कितना भी तनावपूर्ण क्यों न हो, मां की आवाज सुनते ही सारी थकान दूर हो जाती है।

दिव्यांजलि ने कहा कि मां केवल जन्म देने वाली नहीं होती, बल्कि वह हर परिस्थिति में बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत बनाती है। उन्होंने कहा कि बच्चों की सफलता के पीछे मां के अनगिनत त्याग छिपे होते हैं, जिन्हें अक्सर शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता।

चारों अधिकारियों ने देश की सभी माताओं को मदर्स डे की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हर मां अपने बच्चों के लिए किसी योद्धा से कम नहीं होती। वह अपने सपनों से पहले बच्चों के सपनों को रखती है और हर मुश्किल में उनके साथ खड़ी रहती है। उन्होंने कहा कि आज समाज में जो भी सफल लोग दिखाई देते हैं, उनके पीछे किसी मां का संघर्ष जरूर होता है।

मदर्स डे पर इन महिला अधिकारियों की बातें केवल एक भावुक कहानी नहीं, बल्कि समाज के लिए एक बड़ा संदेश भी हैं। यह संदेश कि सफलता केवल मेहनत से नहीं मिलती, बल्कि उसके पीछे परिवार का समर्थन, मां का त्याग और संस्कारों की नींव भी उतनी ही जरूरी होती है। मां वह शक्ति है, जो बच्चों को गिरने से बचाती ही नहीं, बल्कि गिरने के बाद दोबारा खड़ा होना भी सिखाती है।

आज के दौर में जब लोग सफलता को केवल पद और पैसे से जोड़कर देखते हैं, तब इन अधिकारियों की बातें यह याद दिलाती हैं कि असली सफलता वही है, जिसमें इंसान अपने संस्कार और संवेदनाएं बचाकर रखे। और इन दोनों की शुरुआत सबसे पहले मां से ही होती है।

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